मुग़ल काल और साम्राज्य/ Mughal empire Period in Hindi

Mughal empire Period in Hindi

मुग़ल काल और साम्राज्य/ Mughal empire Period in Hindi

दिल्ली सल्तनत के पश्चात भारत में मुग़लवंश का शासन आरम्भ हुआ. भारत में मुग़ल राज्य की स्थापना बाबर ने 1526 ई. में की थी.उसके उत्तराधिकारियों – हुंमायू, अकबर, जहाँगीर, शाहजहाँ और ओरंगजेब के समय में मुग़ल साम्राज्य की शक्ति और समृधि में उत्तरोत्तर विकास हुआ. समस्त भारत पर अपनी सत्ता स्थापित कर मुगलों ने एक मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था को स्थापित किया.

मुग़ल काल आर्थिक समृधि, कलात्मक व सांस्कृतिक उपलब्धियों के लिए भी विख्यात हो गया. 1707 ई. को मुगलवंश के अंतिम महान सम्राट औरंगजेब की मृत्यु के साथ ही मुग़ल साम्राज्य के पतन की प्रक्रिया आरम्भ हुई. मुगलों का राज्य व उसका गौरव धीरे धीरे विलुप्त होने लगा.

भारत की ईस्ट- इंडिया कम्पनी के शासन के आरम्भ होते ही मुगलों की शक्ति व प्रतिष्ठा भी नष्ट हो गयी. मुग़ल सम्राट का स्थान कम्पनी शासन ने ले लिया. मुग़ल सिर्फ नाम मात्र के सम्राट बने रहे. 1857 के विद्रोह के दौरान कम्पनी ने अंतिम मुग़ल सम्राट बहादुरशाह जफ़र को गद्दी से हटाकर भारत में मुगलवंश का शासन सदैव के लिए समाप्त कर दिया.

1526 ई. में पानीपत के प्रथम युद्ध में दिल्ली सल्तनत के अंतिम वंश लोदी वंश के सुलतान इब्राहीम लोदी की पराजय के साथ ही भारत में मुग़ल वंश की स्थापना हुई थी, जिसका संस्थापक ज़हीरुद्दीन बाबर था.

 

मुग़ल कौन थे….??

मुग़ल शब्द का अर्थ होता है बहादुर. मुग़ल 2 महान शासक वंशो के वंशज थे. माता की ओर से वे चीन व मध्य एशिया के मंगोल शासक चंगेज़ खान के उत्तराधिकारी थे और पिता की ओर से वे ईरान, ईराक व तुर्की के शासक तिमूर के वंशज थे. परन्तु मुग़ल अपने को मुग़ल या मंगोल कहलवाना पसंद नही करते थे.ऐसा इसलिए था, क्योंको चंगेज़ खान से जुडी स्म्रतियां सैकड़ों व्यक्तियो के नरसंहार से सम्बंधित थीं.

यही स्मृतियाँ मुगलों के प्रतियोगियों उज्बेगों से भी सम्बंधित थीं. दूसरी तरफ, मुग़ल तिमूर के वंशज होने पर गर्व का अनुभव करते थे, क्योंकि उनके इस महान पूर्वज ने 1526 ई. में दिल्ली पर नियंत्रण कर लिए थे.

 

बाबर (1526- 1530 ई.)

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12 वर्ष की अल्पायु में 1494 ई. में ट्रांस औक्सियाना के फरगना का शासन बना था. बाबर ने भारत पर प्रथम आक्रमण बाजौर व भेरा पर 1519 ई. में युसूफजाई जाती के विरुद्ध किया, जिनको भारत का प्रवेश द्वार कहा जाता था. भेरा, झेलम नदी के तट पर स्थित है. भारत में सर्वप्रथम बाबर ने वारुह- तोपखाना का प्रयोग भेरा युद्ध में किया था, परन्तु उसका प्रथम महत्वपूर्ण आक्रमण 1526 ई. में पानीपत का युद्ध था.

 

बाबर द्वारा लडे गये प्रमुख युद्ध

1). पानीपत का प्रमुख युद्ध (21 अप्रैल, 1526 ई.)

स्थल: पानीपत, हरियाणा

सेनापति: अब्दुल अज़ीज़+ मुहिबअली

तोपखाना प्रमुख: उस्ताद अली कुली

इसमें बाबर ने इब्राहीम लोदी की हराकर भारत में मुग़ल वंश की स्थापना की थी. बाबर ने इस युद्ध में तुगलुमा युद्ध पद्यति व तोपखाने का प्रथम बार प्रयोग किया.

तोपों को सजाने की उस्मानी पद्यति (दो गाड़ियों के बेच तोप रखना) का प्रयोग किया गया. युद्ध जीतने के बाद बाबर ने सरदारों को उचित पुरूस्कार दिए और हुंमायूं ने बाबर को कोहिनूर हीरा दिया. हुंमायूं ने यह हीरा ग्वालियर के दिवंगत राजा विक्रमादित्य के परिवार से प्राप्त किया था. भारत विजय के उपरांत प्रत्येक काबुल निवासी को एक- एक चांदी के सिक्के उपहार में दिए. बाबर की इस उदारता के लिए उसे कलंदर कह कर पुकारा गया.

 

2). खानवा का युद्ध (17 मार्च, 1527 ई.)

खानवा फतेहपुर सीकरी से 10 मील दुरी पर था जहाँ बाबर ने राणा सांगा (मेवाड़ शासक) को हराया. युद्ध जीतने के बाद बाबर ने गाजी की उपाधि धारण की थी.

3). चंदेरी का युद्ध (5 मई, 1528 ई.)

इसमें बाबर ने मेदिनीरायको पराजित किया और उसकी 2 पुत्रियों में से एक को हुंमायूं व दूसरी को कामरान को प्रदान किया गया था.

4). घाघरा का युद्ध (5 अप्रैल, 1529 ई.)

इस युद्ध में बाबर ने घाघरा के तट (बिहार) पर अफगानों को पराजित किया था. यह बाबर द्वारा लड़ा अंतिम युद्ध था. मध्यकालीन इतिहास में घाघरा का युद्ध प्रथम था, जो जल व थल दोनों स्थलों पर लड़ा गया.

मुग़ल काल और साम्राज्य/ Mughal empire Period in Hindi

 

हुंमायूं (1530- 1556 ई.)

 

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बाबर के 4 पुत्रों (1. हुंमायूं, 2. कामरान, 3. असकरी, 4. हिंदाल) में हुंमायूं सबसे बड़ा था.

पिता की इच्छानुसार असकरी को सम्बल, हिंदाल को अलवर तथा कामरान को काबुल और कंघार का प्रांत दिया.

30 दिसम्बर 1530 को बिना किसी अवरोध के आगरा में हुंमायूं का राज्याभिषेक हुआ. हुंमायू ने दिल्ली के निकट दीन पनाह नगर की स्थापना की थी.

 

हुंमायू द्वारा लाडे गये प्रमुख युद्ध

1). कालिंजर पर आक्रमण (1531 ई.)

प्रथम सैनिक अभियान बुंदेलखंड में स्थित कालिंजर के विरुद्ध हुआ था. कालिंजर के शासक प्रताप रूद्र देव पर आक्रमण किया परन्तु ये असफल रहा.

2). दोहरिया का युद्ध (1532 ई.)

अफगानी शासक महमूद लोदी से प्रथम मुकाबला गोमती नदी के तट पर स्थित दोहरिया नामक स्थल पर महमूद लोदी को पराजित किया.

3). चुनार का युद्ध (1532 ई.)

बनारस के निकट चुनार पर अधिकार किया. यह पुर्वी भारत के द्वार के रूप में विख्यात था.

4). बहादुरशाह से संघर्ष (1535- 36 ई.)

हुंमायू ने गुजरात के शासक मांडू और चम्पानेर के दुर्ग को जीता. बहादुरशाह ने तुर्की तोपची रूमी खां की सहायता से तोपखाना तैयार किया था.

5). चौसा का युद्ध (26 जून, 1539 ई.)

यह युद्ध हुन्मायु और शेर खां के मध्य चौसा नामक स्थल पर हुआ. चौसा कर्मनाशा नदी पर स्थित था. इस युद्ध में हुंमायू पराजित हुआ. युद्ध जितने के बाद शेर खां ने शेरशाह की उपाधि धारण कर ली. इस युद्ध में हुंमायू बड़ी मुश्किल से निजाम नामक एक भिश्ती की सहायता से गंगा पार कर सका.

6). कन्नोज का युद्ध (17 मई, 1540)

इस युद्ध में शेरशाह ने हुंमायू को पराजित कर आगरा और दिल्ली पर अधिकार कर लिया और हुंमायू भारत छोड़कर सिंध चला गया.

इस आधार पर हुंमायू का शासन काल 2 चरणों में विभक्त है.

हुंमायू 15 वर्ष के निष्कासितजीवन के दौरान हुंमायू ने हिंदाल के गुरु मीर अली अकबर की पुत्री हमीदाबानो बेगम से 1541 में विवाह किया जिसने कालांतर में अकबर को जन्म दिया.

 

अकबर (1556- 1605 ई.)

अकबर का जन्म 1542 ई. में हुंमायू के प्रवास काल के दौरान, अमरकोट में हुआ था. बैरम खां की देखरेख में पंजाब के गुरुदासपुर जिले के कालानौर (करनाल) नामक स्थल पर 14 फरबरी 1556 को मिर्जाअबुल कासिम द्वारा अकबर का राज्यभिषेक कराया गया.

सिंहासन पर बैठते ही अकबर ने 5 नवंबर 1556 में पानीपत के दुसरे युद्ध में हिन्दू राजा हेमू (विक्रमादित्य) को पराजित किया.

अकबर राजपूत नीति के फलस्वरूप 1563 में तीर्थयात्रा कर तथा 1564 में जजिया कर को समाप्त कर दिया.

1575 में अकबर ने आगरा से 36 किमी. दूर फ़तेहपुर सीकरी नामक नगर की स्थापना की और उसमें प्रवेश के लिए बुलंद दरवाज़ा बनवाया.

18 जून 1576 ई. को हल्दीघाटी के प्रसिद्ध युद्ध में अकबर के सेनापति राजा मानसिंह ने मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप को पराजित किया.

1583 ई. में अकबर ने एक नया संवत इलाही संवत जारी किया.

जनता में सम्राट के प्रति सम्मान व भय की भावना पैदा करने के लिए वह प्रतिदिन सुबह प्रजा को अपने महल के झरोखा दर्शन देता था. उसके दरबार में आने- जाने की घोषणा नगाड़ा बजाकर की जाती थी.

दरबार के मुख्य सरदारों को पूरी साज-सज्जा के साथ घोड़े पर बैठकर प्रतिदिन महल का चक्कर लगाना पड़ता था. यह प्रथा चौकी और तस्लीम-ए- चौकी कहलाती थी.

अकबर ने दास प्रथा को समाप्त कर दिया . बहुविवाह को प्रतिबंधित किया तथा विधवा विवाह को प्रोत्साहन किया. बाल विवाह को रोकने के लिए अकबर ने 16 वर्ष से कम आयु के बालक तथा 14 वर्ष से कम आयु की कन्या का विवाह वर्जित कर दिया.

अकबर के पुत्र सलीम के विद्रोह के कारण अकबर के अंतिम दिन दुःख भरे व्यतीत हुए. 25 अक्टूबर 1605 ई. में अकबर की मृत्यु पेचिश बिमारी के कारण हुई.

मुगल साम्राज्य का रोचक इतिहास

 

जहाँगीर (1605- 1627 ई.)

इसके बचपन का नाम सलीम था. अकबर की मृत्यु के बाद अनेक इतिहासकार 3 नवंबर 1605 को आगरा के दुर्ग में इनका राज्यभिषेक हुआ मानते हैं, परन्तु वाकियात-ए-जहाँगीर में राज्यभिषेक की तिथि 12 अक्टूबर 1605 ई. दी गयी है.

सिंहासन पर बैठते ही जहाँगीर के पुत्र खुसरो ने विद्रोह कर दिया जिसे जहाँगीर ने पकडवाकर अँधा करवा दिया.

जह्न्गीर ने सिखों के 5 वें गुरु अर्जुन देव को शहजादे खुसरो की सहायता करने के कारण फ़ासी करवा दी.

जहाँगीर की अपनी पुस्तक तुजुक-ए- जहाँगीर (फ़ारसी भाषा) में 12 अध्यादेशों का उल्लेख मिलता है जिन्हें आइने-ए- जहाँगीर कहा जाता है.

जहाँगीर ने निसार नामक सिक्के का प्रचलन किया, इसके शासनकाल में मुग़ल चित्रकला चरम पर थी.

उसने राज्य की जनता को न्याय दिलाने के लिए न्याय की प्रतिक सोने की जंजीर को अपने आगरा किले के शाहबुर्ज के बाहर 60 घंटियाँ लगवाई थीं.

जहाँगीर ने 1612 ई. में प्रथम बार रक्षा बंधन का त्यौहार मनाया तथा अपनी कलाई पर राखी बंधवाई थी, जहाँगीर इसको निगाह-ए-दश्त कहता था.

जहाँगीर ने एक फरमान जारी कर अंग्रेजों को कुछ व्यापारिक सुविधाएँ प्रदान की तथा पुर्तगालियों के आक्रमण के विरुद्ध उनकी सहायता का भी आश्वासन दिया.

जहाँगीर अनारकली से प्रेम करता था और 1615 ई. में लाहौर में एक सुंदर कब्र बनवाई.

श्रीकांत नामक हिन्दू को जहाँगीर ने हिन्दुओं का जज नियुक्त किया.

 

शाहजहाँ (1627- 1658 ई.)

इसके बचपन का नाम खुर्रम था. शाहजहाँ ने दिल्ली के निकट शाहजहाँनाबाद नगर की स्थापना की और आगरा से राजधानी दिल्ली में परिवर्तित की थी. इसे आजकल पुरानी दिल्ली के नाम से जाना जाता है.इसी में उसने सुरक्षा दुर्ग का निर्माण कराया जिसे लाल किला के नाम से जाना जाता है. उसने इसी किले में दीवान-ए-ख़ास का निर्माण करवाया.

उसने अपना व अपनी बेगम मुमताज़ महल का मकबरा आगरा में बनवाया जो ताजमहल के नाम से प्रसिद्ध है. इसके निर्माण में प्रयुक्त होने वाला संगमरमर मकराना (राजस्थान) से प्राप्त हुआ था. ताजमहल का निर्माण 1632 से 1653 ई. के बीच हुआ.

शाहजहाँ के शासनकाल को द्वितीय स्वर्ण काल कहा जाता है.

1634 ई. में शाहजहाँ ने यह आदेश दिया कि यदि कोई हिंदू इस्लाम धर्म स्वीकार करता है तो उसे अपनी पैतृक संपत्ति में हिस्सा मिल जाएगा. इसके अतिरिक्त उसने मुस्लिम लड़की के हिंदू पुरुष से विवाह पर प्रतिबंध लगा दिया. हिंदुयों पर तीर्थयात्रा कर भी लगाया गया.

शाहजहाँ के काल में सुंदरदास,  चिंतामणि तथा कवीन्द्रआचार्य हिंदी के महान विद्वान तथा कवि थे.

1658 ई. में औरंगजेब ने विजय प्राप्त करते हुए राजधानी पर अधिकार कर लिया तथा शाहजहाँ को गिरफ्तार कर आगरा किले में कैद कर दिया, जहाँ 1666 ई. में शाहजहाँ की मृत्यु हो गयी.

 

औरंगजेब (1658- 1707 ई.)

सिंहासन पर बैठने से पहले ये दक्कन के गवर्नर थे जो आलमगीर के नाम से सिंहासन पर बैठा.

सम्राट बनने के उपरांत औरंगजेब ने जनता के आर्थिक कष्टों के निवारण हेतु राहदारी और पानदारी को समाप्त कर दिया. उसने राज्य की गैर- मुस्लिम जनता पर जजिया कर फिर से लगा दिया.

औरंगजेब ने हिन्दू त्योहारों को सार्वजानिक रूप से मनाये जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था. उसने राज्य में सार्वजनिक रूप से नृत्य तथा संगीत पर भी प्रतिबंध लगा दिया जबकि वह खुद ही एक कुशल वीणा वादक था.

अपने व्यक्तित्व और चारित्रिक गुणों के कारण औरंगजेब को जिन्दा पीर के नाम से जाना जाता है.

औरंगजेब के समय में मुग़ल साम्राज्य क्षेत्रफल की द्रष्टि से चरमोत्कर्ष पर था. यह काबुल से लेकर चटगाँव तक और कश्मीर से लेकर कावेरी नदी तक विस्तृत था.

औरंगजेब ने अपनी बेगम के आग्रह पर ताजमहल की प्रति का निर्माण किया जिसे बीवी का मकबरा (दूसरा ताजमहल) के नाम से जाना जाता है. यह मकबरा औरंगाबाद में स्थित है, इसे काला ताजमहल व दक्षिण का ताजमहल के उपनाम से जाना जाता है.

औरंगजेब की मृत्यु 1707 ई. में हुई और उसका खुद का मकबरा औरंगाबाद में है.

 

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