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How Loudspeakers works in Hindi/ लाउडस्पीकर कैसे काम करता है

How Loudspeakers works in Hindi

How Loudspeakers works in Hindi/ लाउडस्पीकर कैसे काम करता है

आज कल शादी, पार्टी में डीजे सिस्टम जैसे आम बात है और हमारे घरों में भी छोटे छोटे लाउडस्पीकर होते हैं जिनसे हम संगीत सुनते हैं. रेडियो, टीवी में भी स्पीकर लगे होते हैं, तो कहने का मतलब है कि लाउड स्पीकर आज के समय में बहुत ही ज्यादा use होने वाली sound making मशीन है जिसके बारे में सब लोग जानते हैं. बहुत से लोग सोचते हैं कि आखिर ये स्पीकर काम कैसे करता है और तेज़ ध्वनि के साथ आवाज़ कैसे निकालता है और वो लोग जो स्पीकर के बिज़नेस में रूचि रखते हैं वो भी इन्टनेट पर सर्च करते रहते हैं स्पीकर की working के बारे में, तो चलिए हम यहाँ बात करते हैं “How Loudspeakers works in Hindi/ लाउडस्पीकर कैसे काम करता है”.

How Loudspeakers works in Hindi

 

 

लाउडस्पीकर बिजली से साउंड कैसे बनाता है…??

हमने कई जगह देखा होगा कि जब कोई चीज़ तेज़ी से हिलती है या फिर कंपन्न (vibrate) करती है तब उसमें से आटोमेटिक ही कुछ ना कुछ आवाज़ सुनाई देने लगती है. अगर हम बात करें शादी बारात में बजाये जाने वाले ड्रम की जिसको लकड़ी की छड से बजाया जाता है तो जब stick से उसको पिटा जाता है तो उसकी skin बहुत ही तेज़ी के साथ आगे पीछे vibrate होती है जिससे आवाज़ पैदा होती है, लाउडस्पीकर भी ठीक इसी तरह काम करता है.

लाउड स्पीकर में आगे की तरफ एक गोल आकार का cone होता है जिसे diaphragm भी कहते हैं जो कि पेपर, प्लास्टिक या फिर किसी हल्के मेटल का बना हुआ होता है. इसके पीछे एक iron coil लगी होती है जो एक permanent magnet के ठीक आगे होती है, जो कि electromagnet से magnetic field बनती है.

जब स्पीकर की coil को amplifier से connect किया जाता है और उसको power दी जाती है तो electromagnetic field generate होता है जिससे वो coil को बार बार अपनी तरफ खिचता है और बार बार amplifier के signal के अनुसार उसे छोड़ता है जिससे coil के vibration से साउंड generate होने लगती है.

 

स्पीकर कैसे different volume और frequency की साउंड निकलता है…??

जब स्पीकर की coil बहुत तेज़ी के साथ कंपन्न (vibrate) करती है तो साउंड तेज़ निकलती है और जब धीर धीर vibrate करती है तो धीरे साउंड निकलती है. जैसा कि ड्रम बजाने पर होता है कि अगर हम ड्रम को तेज़ी से बजायेगे तो तेज़ साउंड निकलेगी और जब धीरे धीरे hit करेंगे तो कम साउंड निकलती है.

जब amplifier से तेज़ electric pulse आती हैं तो इससे coil का vibration तेज़ होता है और जब electric pulse धीर आती हैं तो धीर आवाज़ होती है. जैसा कि physics का नियम है कि हम energy को बना नही सकते सिर्फ उसको एक रूप से दुसरे रूप में बदल सकते हैं, तो यहाँ जो electric energy coil को दी जाती है उसी energy को साउंड energy में convert किया रहा है.

 

Types of Loudspeaker/ लाउड स्पीकर के प्रकार

सामान्यत: लाउड स्पीकर को हम तीन भागों में विभाजित करते हैं जो कि उसके size पर depend करता है.

 

1). Tweeter: इसमें बड़े size का driver होता है जो 2000 Hz तक से ज्यादा की sound frequency को handle कर सकता है. बड़े बड़े डीजे सिस्टम में यही sound driver use किया जाता है.

2). Mid range: ये साउंड driver 200 से 2000 Hz अटक की साउंड frequency को handle कर सकता है.

3). Woofer: ये साउंड driver 200 Hz से कम की साउंड frequency के लिए best होता है. हमारे घरों में जो छोटे छोटे woofer होते हैं वो इसी size के होते हैं.

 

डीजे सिस्टम में सिर्फ कोई एक driver नही होता, उसमें तीनो तरीके के साउंड driver होते हैं जिससे 200 से 2000 Hz तक की किसी भी frequency की साउंड generate की जा सकती है.

 

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उम्मीद करता हूँ कि “How Loudspeakers works in Hindi” आर्टिकल आपको पसंद आया होगा.

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