Introduction to Solar Cooker in Hindi सोलर कूकर

Introduction to Solar Cooker in Hindi

Introduction to Solar Cooker in Hindi सोलर कूकर

सोलर कूकर के बारे में शायद आपने सूना भी होगा और पढ़ा भी होगा कि सोलर कूकर एक ऐसी device है जो सूर्य की रोशनी से खाना पकाने के काम में आती है.

सोलर कूकर एक ऐसा यंत्र है जो सूर्य की रौशनी की ऊर्जा को heat ऊर्जा में convert करता है, जो विभिन्न उपयोगी कार्यों में अपनी भूमिका रखता है, उदहारण के तौर पर खाना पकाने, पाश्चरीकरण, सोलर ओवन आदि.

सोलर कूकर पर्यावरण सुरक्षा में अपना बहुत महत्वपूर्ण योगदान देता है क्योंकि इसमें खाना पकाने के लिए किसी भी प्रकार के ईंधन की आवश्यकता बिल्कुल भी नही होती जिनका प्रभाव सीधे पर्यावरण पर ऐसे होता है कि पर्यावरण प्रदुषण कम होने लगता है और वातावरण में कार्बन की मात्रा भी कम हो जाती है.

साथ ही साथ अगर ज्यादा से ज्यादा सोलर कूकर का उपयोग किया जाए तो पेड़ों और जंगलों की कटाई जो लकड़ी ईंधन के लिए होती है, बहुत ही कम हो जायेगी और वृक्षों की संख्या बढ़ने से पर्यावरण खुद ब खुद शुद्ध होने लगेगा.

 

सोलर कूकर का सिद्धांत

1). सोलर कूकर में कांच का एक शीशा इस तरीके से लगाया जाता है कि उस पर पड़ने वाला सूर्य का प्रकाश किसी एक बिंदु पर जाकर फोकस करने लगे. जब लगातार किसी एक बिंदु या जगह पर सूर्य प्रकाश पड़ता है तो सिर्फ कुछ ही देर में वो जगह काफी गर्म हो जाती है.

 

2). सोलर कूकर के उस प्रकाशित फोकस बिंदु वाले केद्र पर ऐसा solar pot या बर्तन होता है जिसके ऊपर काले रंग की एक plate होती है, जो गर्मी को अवशोषित (सोखती) करती है.

इस मटेरियल की ख़ास बात यही होती है कि ये गर्मी को बहुत जल्दी ही सोख लेता है जिससे प्रकाश ऊर्जा heat में बदल जाती है.

 

3). अब जब हमने सोलर पैन को काफी गर्म कर लिया है तो इसको लम्बे समय तक गर्म बनाये रखने के लिए हम कूकर के चारों तरफ insulation करते हैं जिससे अंदर की गर्मी बाहर ना जाए और ना ही बाहर की ठंडक कूकर के अंदर आने पाए, जिससे कूकर के बर्तन (pot) का तापमान लगातार बढता रहता है.

 

Operation of solar cooker कार्यप्रणाली

सोलर कूकर अलग अलग प्रकार और आकृति के हो सकते हैं लेकिन सभी का काम करने का तरिका और कार्यप्रणाली ज्यादातर एक जैसी ही रहती है.

सबसे पहले तो हमें यह जानना बहुत ही जरुरी होता है कि सोलर कूकर में हम किस तरीके का भोजन और कितनी देर में बना सकते हैं.

तो यह बात ध्यान रखने की है कि अगर आप सब्जी आदि जैसी चीज़ों को अगर छोटे छोटे हिस्सों में काट करके सोलर कूकर में रखेंगे तो आपका खाना जल्दी तैयार हो जाएगा.

अगर आपके कूकर का मुंह काफी बड़ा है तो आप अलग अलग बॉक्स और container में अलग अलग तरीके का भोजन रख सकते हैं.

भोजन सोलर कूकर के पूरा गर्म होने के बाद ही रखें. अगर आप ठंडे कूकर में भोजन रख देते हैं तो कूकर की कार्यक्षमता कम हो जाती है और भोजन को पकने में काफी ज्यादा समय लगता है.

 

Solar cooker vs Fire stove

फायर स्टोव की तुलना में सोलर कूकर एक घंटे से भी ज्यादा समय ले लेता है भोजन पकाने में, लेकिन सोलर कूकर में खाना धीरे धीरे पकने के कई फायदे होते हैं, जिससे भोजन में पानी ज्यादा नही डालना पड़ता, खाना पूरी तरह से गलने के बावजूद घुटता नही है, जैसा स्टोव में आम बात है कि खाना पूरी तरह से घुट जाता है.

सोलर कूकर में विटामिन और nutrition पूर्ण मात्रा मैं भोजन में बने रहते हैं जबकि स्टोव के खाने में ये काफी हद तक ख़त्म हो जाते हैं क्योंकि प्रोटीन और विटामिन दोनों ही अधिक तापमान पर गर्म करने पर नष्ट हो जाते हैं.

स्टोव को जलाने के लिए हमें ईंधन की जरुरत होती है जिसके जलने पर पर्यावरण को भी हानि पहुँचती है, जबकि यही सबसे ख़ास बात बात है सोलर कूकर की कि ये एकदम फ्री है, जिसमे ना तो कोई ईंधन जलाना पड़ता है और ना ही किसी तरीके का कोई पर्यावरण प्रदुषण होता है.

 

Advantage of solar cooker

1). सोलर कूकर में किसी तरह का कोई फ्यूल use नही होता, जिससे ईंधन के जलने से होने वाले धुंए और पर्यावरणीय हानि का कोई ख़तरा नही रह जाता.

 

2). देश-विदेशों में ना जाने कितने करोड़ों लोग लकड़ी से जलने वाले चूल्हा जलाते हैं, खाना पकाने के लिए. जिसके लिए पेड़ों की लकड़ियों को काटा जाता है, लेकिन सोलर कूकर हमें वनों के पेड़ों को काटने की कतई इजाजत नही देता.

 

3). बड़े और high efficiency के सोलर कूकर जो 250 से 290 डिग्री तापमान तक गर्म हो जाते हैं, खाना पकाने, पानी गर्म करने, ब्रेड बनाना आदि के लिए सबसे उत्तम रहते हैं.

 

Disadvantage

1). सोलर कूकर के उपयोग की संभावनाए वहां ख़त्म हो जाती हैं, जहाँ मौसम बरसात और बादल से घिरा हुआ होता है, ऐसे इलाकों में लोग सोलर कूकर का इस्तेमाल कर ही नही कर सकते, इसलिए उनका ईंधन से चलने वाले स्टोव का उपयोग करना जरुरी हो जाता है.

 

2). वे सोलर कूकर जो low efficiency के होते हैं और उनकी performance इतनी ज्यादा अच्छी नही होती, उनमें खाना पकाने के लिए कई घंटे पहले से तैयारी शुरू करनी पड़ती है, क्योंकि ये भोजन पकाने में स्टोव की तुलना में कई घंटे ज्यादा समय ले लेते हैं.

 

3). अलग अलग किस्म के भोजन बनाने के अलग अलग तरीके होते हैं, जैसे अंडे बनाने के लिए उनको फ्राई किया जाता है या पराठे बनाने का तरिका अलग है, तो इस तरीके के भोजन आप सोलर कूकर में नही बना सकते.

सोलर कूकर में जैसे सूप, डाल, चावल आदि जैसे भोजन बनाये जा सकते हैं, जिसमे कोई रेसिपी ख़ास तरीके से ना की गयी हो, सिर्फ डायरेक्ट उसको चूल्हे में रख दें और वो पक जाए.

 

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उम्मीद करते हैं कि आपको “Introduction to Solar Cooker in Hindi” आर्टिकल पसंद आया होगा.

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One Response

  1. Pipan Sarkar April 20, 2018

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