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भारतीय वैज्ञानिक : एक अनोखा टैलेंट Greatest Indian Scientists in Hindi

Indian Scientists in Hindi vaigyanik Invention

भारतीय वैज्ञानिक : एक अनोखा टैलेंट Greatest Indian Scientists in Hindi

अगर हम कल्पना करें आज से 200 साल पहले के समय की जब लोग परिवहन के लिए घोड़ागाडी जैसे साधनों का इस्तेमाल करते थे, घरों में रौशनी के लिए दीपक और लैंप जलाई जाती थीं, खेती के लिए बैल सबसे महत्वपूर्ण माने जाते थे, जिनके बिना खेती बहुत ही मुश्किल थी.

और आज……हमारे पास ऐसे शब्दों के लिए भी कोई जगह नही है और ये सब संभव हो सका है विज्ञान के जरिये.

हम अपने चारों ओर विज्ञान की दी हुई रचनाओं से घिरे हुए हैं…फिर चाहे वो घर हो या ऑफिस या फिर सड़क.

जब कोई व्यक्ति अपने जीवन को विज्ञान के लिए समर्पित करता है और दुनिया को विज्ञान की नई खोज से रूबरू कराता है तो उन्हें वैज्ञानिक कहा जाता है.

ज्यादातर सफल वैज्ञानिकों में एक बात बहुत सामान्य होती है कि वे लोग अपने स्वार्थ और आलस्य को त्यागकर पूरे मन से अपना कीमती समय विज्ञान को देते हैं और उनकी यही निष्ठां और मेहनत उनको प्रसिद्ध भी बनाती है जिससे पूरे देश और दुनिया में उनका डंका बजता है.

आज मैं यहाँ भारत के कुछ ऐसे ही महान वैज्ञानिकों के बारे में अपने इस आर्टिकल “Indian Scientists in Hindi vaigyanik Invention” को सुसज्जित करके उनको याद कर रहा हूँ, जिन पर हम सभी भारतियों को गर्व होना स्वाभाविक है.

 

होमी जहाँगीर भाभा

 

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30 अक्टूबर 1909 में जन्में इस महान भारतीय वैज्ञानिक ने भारत में सर्वप्रथम परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में कार्य किया, जिसके कारण इनको nuclear program के जनक के रूप में भी जाना जाता है. मैकेनिकल की डिग्री और पीएचडी करने के बाद इन्होने बंगलौर के भारतीय विज्ञान संस्थान की तरफ अपना रुख किया.

शुरुआत में इनके परमाणु ऊर्जा पर काम करने और इनकी सफलता को लेकर कई तरह के प्रश्न भी उठाये गये लेकिन फिर भी ये अपने पथ से बिना डगमगाए कार्यरत रहे.

1956 में भाभा ने भारत को एशिया का पहला परमाणु रिएक्टर दिया जिसके बाद ये अन्तराष्ट्रीय स्तर पर भी जाने माने वैज्ञानिक हो गये और परमाणु एजेंसी में ये उच्च सलाहकार के तौर पर भी कार्यरत रहे.

जब भारत देश आज़ाद हुआ तब ही इन्होने विदेशों में कार्यरत सभी भारतीय वैज्ञानिकों से भारत वापस आने का अनुरोध किया और ये कुछ सफल भी रहे.

पहला परमाणु विस्फोट प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मंजूरी से ही किया गया जिससे भारत खुद एक परमाणु शक्ति वाला देश बना.

सरकार ने भी इनकी मेहनत और इनके हौसलों के लिए इनको कई सम्मानित पुरुस्कारों से इनका मान बढाया और 1954 में इनको पदम्भूषण से सम्मानित किया गया.

भारत के परमाणु शक्ति के इस जनक का एक हवाई विमान दुर्घटना में 1966 को देहान्त हो गया जो भारत के विज्ञान क्षेत्र को एक बहुत बड़ी क्षति थी.

 

 

C.V. Raman (चंद्रशेखर वेंकट रमन)

 

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भौतिक विज्ञान के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक CV Raman की उपलब्धियाँ भारत देश के विज्ञान को अग्रसर करने में अपना अहम् योगदान देती हैं. प्रकाश का प्रकीर्णन तथा रमन प्रभाव जैसी खोज ने भारतीय विज्ञान में जैसे क्रांति ही ला दी, जिसके लिए उनको नोबल पुरूस्कार और “सर” की उपाधि दी गयी.

7 नवम्बर 1888 में जन्में इस भौतिक वैज्ञानिक के पिता भी भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर थे. इन्होने बीएससी भी भौतिक विज्ञान से ही की और वैज्ञानिक गुण भी इनमें अपने पिता से ही था. इनकी गणित विषय में ख़ास रूचि थी जिसके चलते इनको राष्ट्रीय प्रोफेसर भी नियुक्त किया गया.

28 फरबरी को चंद्रशेखर रमन को श्रदांजलि देने के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस संपूर्ण भारत देश में मनाया जाता है. विज्ञान क्षेत्र में नोबल पुरूस्कार से सम्मान प्राप्त करने वाले ये पहले भारतीय वैज्ञानिक भी बने.

इन्होने प्रकाश की तरंग प्रकृति और भारतीय वाद्ययंत्र की हार्मोनिक प्रकृति पर काफी शोध किये और सफलता प्राप्त की.

Information about Great Indian Scientists

 

वेंकटरमन रामकृष्णन

 

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वेंकटरमन रामकृष्णन जीव विज्ञान के वैज्ञानिक हैं जिनको रसायन विज्ञान क्षेत्र में नोबल पुरूस्कार दिया गया था. इन्होने मानव शरीर में पाए जाने वाले राइबोसोम के बारे में गहन अध्ययन किया और अपनी थ्योरी थी, जिसके आधार पर प्रतिजैविकों को अधिक विकसित करने में काफी सहायता हुई है.

इनके साथ 2 वैज्ञानिक और थे जिनके साथ मिलकर इन्होने राइबोसोम की कार्य प्रणाली को अच्छे से समझाने के लिए 3D x-ray की भी मदद ली और बताया कि राइबोसोम कैसे अलग अलग रसायनों के साथ किस तरह की प्रतिक्रिया देते हैं.

इन्होने इस विषय में कई शोध पत्र भी लिखे और हाल ही में उन्होंने राइबोसोम की परमाणु संरचना के बारे में भी शोध किये हैं.

वेंकटरमन रामकृष्णन 1952 में जन्मे थे और इनके माता- पिता भी वैज्ञानिक ही थे. इन्होने भौतिक विज्ञान में स्नातक और पीएचडी भी की, लेकिन बाद में इनकी रूचि जीव विज्ञान में होने लगी और उन्होंने जीव विज्ञान में ही काफी सफलताएं हासिल कीं.

 

सर विश्वेश्वरैया

 

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सर विश्वेश्वरैया को आधुनिक भारत का इंजीनियर कहा जाता है. शुरुआत में इनके पास पढाई के लिए धन का अभाव था इसलिए इन्होने अपना पूरा ध्यान अपनी पढ़ाई में लगते हुए बीई की परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया, जिसके बाद सरकार की मदद से इन्होने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई अच्छे से पूरी की.

इन्होने इंजीनियरिंग के पद पर रह कर काफी ऐसे कार्य किये हैं जिनकी लोग कल्पना भी नही करते थे. इन्होने सिंधु नदी के बाँध में कुछ ऐसे अलग कार्य कराये जिससे उसके पानी को सिंचाई के लिए भी उपयोग में लाया जा सके.

इन्होने राजसागर बाँध का भी निर्माण उस समय करवाया जब भारत देश में सीमेंट बिलकुल नही बनता था, इसलिए इसके लिए इन्होने मोर्टार बनवाया जो सीमेंट से भी कही अधिक मजबूत था.

1955 में इनको भारत- रत्न से सम्मानित किया गया और साथ ही उनके जन्मदिन 15 सितम्बर को भारत में अभियंता दिवस के रूप में मनाया जाता है.

भारत के कुछ वैज्ञानिक के बारेमें जानकारी

 

सुब्रह्मण्यन् चन्द्रशेखर

 

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19 अक्टूबर 1910 को लाहौर में जन्मे चन्द्रशेखर भौतिक शास्त्र के विख्यात वैज्ञानिक हैं जिन्होंने पहले भारत में रहकर कार्य किया और बाद में ये अमेरिका चले गये. भौतिक शास्त्र के गहन विचारक के रूप में इनको भौतिकी में नोबल पुरस्कार भी दिया गया.

इन्होने तारों और आकाशगंगा के बारे में काफी रिसर्च किया और अपने शोध पत्र भी लिखे जिसमें इन्होने तारों के टूटने और विलुप्त होने जैसी जानकारियाँ दीं. उन्होंने यह भी बताया कि कैसे और किस हालातों में कोई तारा अपने आप को ब्लैक होल में तब्दील कर लेता है.

हालाँकि भारत में इनको काफी सम्मान मिला इनकी खोजों के लिए परंतु और अधिक जानकारी और अध्ययन के लिए देश से बाहर चले गये और फिर कभी भारत नही आये.

1969 में प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने इनको परम विभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया और इस बात भी खेद जताया कि वो अब भारत से बाहर रहकर कार्यरत हैं.

1995 को अमेरिका देश के शिकागो में दिल का दौरा पड़ने से इनकी म्रत्यु हो गयी और रह गयी तो सिर्फ खगोल जगत के भावी पीढ़ी के लिए उनकी प्रेरणा.

 

जगदीश चन्द्र बसु

 

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जगदीश चन्द्र बसु को रेडियो विज्ञान का जनक माना जाता है, जिन्होंने रेडियो और सूक्ष्म तरंगों के बारे में गहन अध्ययन कर अपनी थ्योरी दीं. इनको भौतिक, रसायन और जीव विज्ञान का गहरा ज्ञान था.

इन्होने कलकत्ता से स्तानातक की और आगे की पढ़ाई के लिए लन्दन भी गये. इन्होने अध्यापक के रूप में भी कार्यरत रहते हुए अपने शोधों की पुस्तकें भी प्रकाशित कीं.

इन्होने क्रेस्कोग्राफ नामक यंत्र की रचना की जिससे वे पौधों की रचना और उनकी प्रतिक्रिया के बारे में जानकारी हासिल कीं और पूरी दुनिया को बताया कि पेड़- पौधों में भी जीवन होता है.

साथ ही इन्होने ऐसे मशीन का आविष्कार भी किया जिससे बिना तारों के संदेशों को भेजा जा सकता था, जिसे हम वायरलेस टेक्नोलॉजी कहा जाता है और उनकी इसी रिसर्च के आधार पर रेडियो, टीवी और इन्टरनेट काम करते हैं.

 

श्रीनिवास रामानुजन

 

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रामानुजन भारत के महान गणितज्ञ के रूप में इन्होने मात्र 32 साल की उम्र में ही गणित के क्षेत्र में बहुत सारी खोजें की हैं वो भी बिना किसी विशिष्ट पढ़ाई के. धन के अभाव में ये पढ़ाई भी नही कर पाए थे लेकिन आप इनके टैलेंट का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं बिना विशिष्ट पढ़ाई के इन्होने खुद से पढ़ कर ही सिर्फ 11 साल की उम्र में स्कूल में कोलेज के गणित को हल करते थे और सिर्फ 13 साल में इन्होने एडवांस मैथ रट लिया था और मात्र 32 साल की उम्र में मैथ की करीब 3900 गणित के समीकरण की खोज की.

इन महापुरुष के सम्मान में पूरा देश इनके जन्मदिन को नेशनल मैथमेटिकल डे के रूप में मनाता है. अपना पूरा जीवन गणित को समर्पित करने के बाद मात्र 33 साल की उम्र में ही रामानुजम ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया.

 

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अगर आपको ये आर्टिकल Indian Scientists in Hindi vaigyanik Invention पसंद आया है तो कमेंट करके जरुर बताइएगा.

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Hope you Enjoy & Learn !!

3 Comments

  1. Pipan Sarkar May 28, 2018
  2. manjeet singh May 31, 2018
  3. Bhawanigiri June 2, 2018

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