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Best Article on Energy in Hindi/ ऊर्जा

Energy in Hindi

Energy in Hindi/ ऊर्जा

वैसे तो ऊर्जा को सरल तरीके से समझाना बहुत ही कठिन है, क्योंकि ऊर्जा ना तो दिखाई देती है, ना ये कोई जगह घेरती है और ना ही इसका कोई रूप होता है.

चूँकि ऊर्जा किसी भी प्रकार का कोई द्रव्य नहीं है, लेकिन फिर भी ये हर प्रकार के द्रव्यों से घनिष्ठ सम्बन्ध बनाये रखती है.

 

ऊर्जा को अगर परिभाषित करें “कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं“.

ऊर्जा सभी वस्तुओं का एक भौतिक गुण है, जिसके जरिये अन्य वस्तुओं को एक स्थान से दुसरे स्थान तक स्थानांतरित किया जा सकता है या फिर उसको अलग-अलग रूपों में भी परिवर्तित किया जा सकता है.

 

उदहारण के तौर पर, अगर ऊर्जा को समझा जाए तो, किसी ऊंचाई से नीचे गिरते हुए पानी में ऊर्जा होती है और इसकी ऊर्जा को मानव अपने विभिन्न कामों में लाता है, जैसे इस पानी से बड़े- बड़े टरबाइन घुमाये जाते हैं और बिजली पैदा की जाती है.

ऊर्जा को ना तो उत्पन्न किया जा सकता है और ना ही नष्ट किया जा सकता है. इसको सिर्फ एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है.

जैसा कि ऊपर उदहारण में बताया गया है कि गिरते हुए जल की ऊर्जा को बिजली (विद्युत ऊर्जा) में परिवर्तित किया जा सकता है.

 

ऊर्जा क्या है What is Energy

 

Energy in Hindi

 

ऊर्जा को और सरल भाषा में समझें तो ऊर्जा कोई वस्तु नहीं है, ना ही इसका कोई रूप- रंग होता और ना ही कोई आकार.

ना तो इसको देखा जा सकता है और ना ही इसे छुआ जा सकता है. ऊर्जा तो सिर्फ किसी वस्तु के उसकी कार्य करने के क्षमता है.

 

ऊर्जा के रूप

1). जब कोई व्यक्ति किसी धनुष पर बाण रखकर उसकी डोर को खींचता है तो धनुष में ऊर्जा उत्पन्न हो जाती है, जिसका उपयोग करके व्यक्ति दूर तक बाण फैकने में सक्षम हो जाता है.

अगर ऊर्जा नहीं होगी तो वो बाण को बिलकुल भी नहीं फैक सकता.

Energy in Hindi/ ऊर्जा

 

2). इसी तरीके से अगर बात करें बारूद की, तो उसमें भी ऊर्जा होती है जिससे विभिन्न प्रकार के कार्य किये जाते हैं जैसे कि बड़े-बड़े पत्थर और पहाड़ तोड़ने में, तोप गोले को दागने में आदि. 

 

3). विधुत धारा (बिजली) अपने अंदर ऊर्जा का बड़ा समावेश रखती है, जिससे बड़ी-बड़ी मोटरें, प्लांट चलाये जाते हैं.

बिजली की इस ऊर्जा का उपयोग घरों में रौशनी के लिए, फैक्ट्रियों को चलाने में आदि कार्यों में किया जाता है.

 

4). सूर्य की ऊर्जा के बारे में तो सब लोग जानते ही होंगे, जिसके बिना धरती पर जीवन संभव ही नहीं है. इसकी ऊर्जा के उपयोग के लिए मानव ने सोलर पैनल जैसी तकनीक को भी खोजा है, जिससे इस अथाह ऊर्जा को अपने उपयोग में लाया जा सके.

 

कार्य और ऊर्जा

ऊर्जा अविनाशी है और ये सिद्धांत अटल है, जिसके अनुसार, ना तो ऊर्जा को बनाया जा सकता है और ना ही नष्ट किया जा सकता है.

मानव अलग-अलग उपाय और अविष्कारों से ऊर्जा को सिर्फ एक रूप से दुसरे रूप में परिवर्तित करता है, जैसे पानी से बिजली बनाई और फिर बिजली से मोटर चलाई.

ऊर्जा का मात्रक जूल है.

अगर देखा जाए तो कार्य और ऊर्जा में घनिष्ट सम्बन्ध है, लेकिन ये एक नहीं हैं.

उदहारण के तौर पर, अगर हम 1 किलो का भार धरती से 1 मीटर की ऊंचाई तक उठायें तो इसके लिए धरती के गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध बल लगाना पड़ता है.

तो कार्य करने के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है, ना कि ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए कार्य की, क्योंकि ऊर्जा को तो उत्पन्न किया ही नहीं जा सकता.

Energy in Hindi/ ऊर्जा

 

ऊर्जा के प्रकार

1). यांत्रिक ऊर्जा

 

Energy in Hindi

 

यांत्रिक ऊर्जा को मैकेनिकल एनर्जी कहा जाता है. इसमें हम वस्तुओं को कार्य करते हुए और ऊर्जा का उपयोग करते हुए अपनी आखों से देख सकते हैं.

जैसे कि जब कोई मोटर किसी पंप को चलाती है तो उसको चलाने में यांत्रिक ऊर्जा का प्रयोग होता है. मोटर पंप को घुमाने के लिए बल लगाती है और ये बल उसकी ऊर्जा को संग्रहित करके भारी से भारी पंपों को चलाता है.

 

स्थितिज ऊर्जा

अगर किसी वस्तु को जिसका वजन एक किलो है, पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध 1 मीटर ऊंचाई पर उठाया जाए, तो उसमें 1 किलोग्राम-मीटर कार्य करने की शक्ति आ जाती है, जो देखा जाए तो 981 जूल के बराबर होती है और उस वस्तु की ऊर्जा भी पहले की अपेक्षा उसी परिमाण में ज्यादा हो जाती है.

 

यह  पृथ्वी और उस वस्तु की आपेक्षिक स्थिति की वजह से होती है, इसका मतलब यह है कि यह ऊर्जा पृथ्वी और वस्तु द्वारा बने सिस्टम की ऊर्जा है., इसलिए ही इसको स्थितिज ऊर्जा कहा जाता है.

 

उदाहरण के तौर पर बात करें तो, किसी नदी पर बाँध बनाकर जल को  ऊंचाई पर एकत्रित किता जाता है तो उसमें पानी और पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के सिस्टम के कारण पानी में स्थितिज ऊर्जा एकत्रित हो जाती है.

 

गतिज ऊर्जा

जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि ये ऊर्जा किसी वस्तु की गति के आधार पर मान्य है. जब किसी धनुष पर तीर चढ़ाया जाता है तो उसमें स्थितिज ऊर्जा होती है और जब तीर छोड़ा जाता है यही स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में  है, जिससे तीर दूर तक जाता है.

गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध कार्य करने पर वस्तु में स्थितिज ऊर्जा उत्पन्न होती है और वायु के विरुद्ध कार्य करने पर गतिज ऊर्जा.

 

2). उष्मीय ऊर्जा

 

Energy in Hindi/ ऊर्जा

 

पहले जब लोगों को ऊर्जा के बारे में ज्यादा ज्ञान नहीं था, तब लोगों का अंदाजा था की कई ऐसी परिस्थितियां होती हैं जहाँ ऊर्जा नष्ट हो जाती है. जैसे जब कोई वस्तु को किसी दिशा में फैका जाता है तो घर्षण के कारण गतिज और स्थितिज ऊर्जा दोनों ही धीरे धीरे कम हो जाती हैं, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता.

ऊर्जा नष्ट नहीं होती, बल्कि ये ऊर्जा उष्मा में बदल जाती है.

बेंजामिन टामसन ने युद्ध की तोपों में देखा कि तोप की नलियाँ छेदते समय बहुत गर्म हो जाती थीं और साथ ही बुरादे भी.

उसने तोप की नाल के चारों ओर काठ की नांद में पानी भर दिया और उसको खरादने के बाद देखा कि दो-ढाई घंटों में सारा पानी बहुत ज्यादा ही गर्म हो गया.

तब हमें पता चला कि उष्मा कोई द्रव नहीं है.

लाग्रांज ने भी यह पता लगाया था कि जानवरों में भोजन से उतनी ही उष्मा निकलती है, जितनी किसी रासायनिक अभिक्रिया से उसी भोजन से उत्पन्न होती है.

Definition of Energy

 

ऊर्जा के स्रोत

आज के समय में जब मानव आधुनिकता को बढ़ावा देने के लिए नयी नयी तकनीकों का इज़ाद कर रहा है, उसमें सबसे महत्वपूर्ण है ऊर्जा.

बिना ऊर्जा के आधुनिक जीवन सम्बव ही नहीं.

हम ऊर्जा को अलग- अलग तरीकों से उपयोग में  जैसे कि बिजली, प्रकाश, यांत्रिक, रासायनिक….. आदि.

जहाँ हम बैटरी की रासायनिक ऊर्जा को विधुत ऊर्जा में परिवर्तित करके बिजली का प्रयोग करते हैं, वहीं मोटर से फैक्ट्रियों के काम किये जाते हैं, जिसमें यांत्रिक ऊर्जा का प्रयोग होता है.

 

ऊर्जा के विभिन्न स्रोत हैं : कोयला, प्राकृतिक गैस, पेट्रोल, सौर ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा आदि.

Energy in Hindi/ ऊर्जा

 

ऊर्जा से संभव हुई औद्यौगिक क्रांति

आधुनिक युग में यातायात परिवहन, टेलीकॉम, इंटरनेट, कपडे, घर आदि सभी चीज़ों में सुधार होने का सबसे महत्वपूर्ण कारण है- मानव को ऊर्जा का सही ढंग से ज्ञान होना.

पहले जब लोगों को पता नहीं था कि ऊर्जा का स्वरुप क्या है, ये कैसे काम करती है और इसको कैसे प्रयोग में लाया जा सकता है, तब लोग इतना ज्यादा विकास नहीं कर पाए थे.

 

लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि हर कार्य बहुत कम समय में संभव हो गया है अब चाहे वो यातायात को लेकर हो या फिर देश- विदेश से जानकारी लेने का.

बिना ऊर्जा प्रयोग के औधोगिकरण संभव ही नहीं.

 

 

लेकिन हमें औधोगिकरण के साथ साथ ऊर्जा के सही ढंग से उपयोग करने पर भी ध्यान देना होगा साथ ही वैकल्पिक स्रोतों जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा आदि पर विशेष ध्यान देना होगा, जिससे आगे जाकर ऊर्जा के सीमित साधन ख़त्म ना होने पाएं.

 

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उम्मीद करता हूँ कि आप सभी को ये आर्टिकल “Energy in Hindi/ ऊर्जा” पसंद आया होगा.

Thanks a lot to be BusinessBharat Blog reader….
Hope you Enjoy & Learn !!

One Response

  1. Sumit Dhangar February 17, 2019

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