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Best Essay on Wildlife Conservation in Hindi/ वन्य जीव संरक्षण

Best Essay on Wildlife Conservation in Hindi

Best Essay on Wildlife Conservation in Hindi/ वन्य जीव संरक्षण

इस संसार में धरती पर जीवन प्रकृति की ही देन है जिसके चलते मानव और समस्त प्राणी यहां जीवन व्यतीत करते हैं.

मानव के विकास और उसकी उन्नति  को प्रशस्त्र करने के लिए प्रकृति ने मानव को वन, नदी, पर्वत इत्यादि जैसे अनमोल उपहार जैसे वरदान में ही दिए हैं जो उसकी प्रगति का मार्ग खोलते हैं.

इनके बिना ना तो कोई प्राणी और ना मनुष्य के जीवन की कल्पना भी व्यर्थ ही है.

अगर हम इतिहास के प्राचीन काल में जाएँ तो देखते हैं कि खुद मनुष्य भी पहले अन्य जीवों की तरह वन्य जीव ही था, परन्तु अपने विलक्षण बुद्धि और मष्तिस्क के चलते वो धीरे धीरे अपने इस वन्य जीवन से बाहर आकर सामजिक हो गया और उसके रहन-सहन के तरीके भी वन्य जीवों से बिलकुल ही अलग हो गए.

लेकिन आज भी प्रकृति के अनमोल उपहारों के बिना उसका जीवन व्यर्थ ही है क्योंकि आधुनिक जीवन के निर्माण के लिए उसको प्रकृति के ही इन उपहारों पर निर्भर रहना है जिसका कोई और दूसरा विकल्प नहीं.

 

वन्य जीव संरक्षण का इतिहास

 

Best Essay on Wildlife Conservation in Hindi

 

अगर भारत देश की बात करें तो वन्य जीव संरक्षण का तो यहां का इतिहास काफी लंबा और अच्छा रहा है.

प्राचीन समय में कवियों की कविताओं  प्रकार प्रकृति की सुंदरता का वर्णन देखने को मिलता था वो स्पष्ट दर्शाता है कि यहां लोग प्रकृति के संरक्षण को लेकर कितने जागरूक थे.

पहले तो सिर्फ कुछ विशेष प्रजाति के जीवों के संरक्षण के लिए भारत देश में नियम क़ानून बनाये गए थे लेकिन 1972 में भारत देश के वन्यजीवन बोर्ड के बाद वन्यजीवन अधिनियम के अनुसार “वन्य जीव संरक्षण” की नींव रखी गयी.

1970 में प्रोजेक्ट टाइगर और 1992 में प्रोजेक्ट एलिफेंट ने सभी को इस कार्य के प्रति जागरूक किया.

भारत भी अंतर्राष्ट्रीय वन्य संरक्षण समिति समिति का विशेष भागीदार बना जिसके बाद देश ने काफी सम्मलेन भी आयोजित कराये जैसे कि रामरस सम्मलेन 1971, वन्य जीव एवं लुप्त प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सम्मलेन 1973, प्रवासी प्रजातियों पर सम्मलेन 1979, जैविक विविधता सम्मलेन 1992 आदि.

अगर आज की बात करें तो भारत में 66 बाघ अभ्यारण, 28 हाथी भण्डार श्रंखला और 668 संरक्षित क्षेत्रों के नेटवर्क के अलावा भारत की केंद्र सरकार के प्रयास इस क्षेत्र में सराहनीय हैं.

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत वन्यजीवों के निवासों और गलियारों की सुरक्षा के लिए किये गए प्रयास गंभीर हैं.

Best Essay on Wildlife Conservation in Hindi

 

क्यों जरुरी है वन्य जीव संरक्षण…??

अगर इस प्रकृति के किसी भी भाग जैसे नदी, पर्वत, वायु, अग्नि या फिर इत्यादि किसी को भी इस धरती से समाप्त कर दिया जाए तो क्या फिर भी जीवन शेष रहेगा.

बिलकुल नहीं…

इसी तरह ये वन्य जीव और वनस्पतियां भी इस प्रकृति का ही अभिन्न अंग हैं जिसके प्रति मानव की उदासीनता बढ़ती ही जा रही है.

नए शहरों का निर्माण, लगातार बढ़ती हुई जनसँख्या, औधोगिकरण और  साथ ही छोटे छोटे हितों के लिए प्रकृति के इस अंग का विनाश करना अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने ही जैसा है.

आज के इस आधुनिक समय में जिस तरीके से प्राकृतिक वन लगातार घटते जा रहे हैं, वृक्षों और वन्य जीवों की प्रजातियां लुप्त हो रही हैं…ये इसी का परिणाम है कि वातावरण के तापमान में भी लगातार वृद्धि हो रही है.

बड़े बड़े वन और जंगल खुले मैदान बनते जा रहे हैं, जिसके फलस्वरूप प्राकृतिक संसाधनों की मात्रा में भारी गिरावट देखने को मिलती है.

दूषित वायु, अशुद्ध जल, कृत्रिम रसायन, वायुमंडल में गैसीय प्रदुषण, बढ़ता हुआ तापमान, वर्षा का अभाव आदि  पर्यावरण के अवयव अपने मौलिक स्वरुप को खोते जा रहे हैं जिसका उत्तरदायी हम स्वम हैं.

Wildlife Conservation

 

लुप्तप्राय प्रजाति अधिनियम क्या है

1973 में लुप्तप्राय जराजाति अधिनियम (इएसए) बनाया गया जिसके अंतर्गत देश में जंगली पौधों और जानवरों की  रक्षा के लिए मजबूत क़ानून बनाये गए.

इस अधिनियम के अनुसार जीवों और पौधों की वे प्रजातियां जो लुप्त हो गयी  हैं या लुप्त होने की कगार पर हैं ,उनको प्रावधानों के तहत संरक्षित किया जाएगा.

लोगों द्वारा की गयी ऐसी गतिविधियाँ जो इन जीवों को किसी  प्रकार की हानि  हैं उन के लिए भी कानून बनाये गए हैं जिससे इन जीवों को पूरी तरह से लुप्त होने से बचाया जा सके.

 

सार्वजनिक भूमि वन्यजीव संरक्षण को कैसे बढ़ावा देती है

किसी भी वन्य जीवों की प्रजाति के जीवन के लिए पर्याप्त भोजन, पानी, आश्रय, स्थान आदि की आवश्यकता होती ही है जिसके बिना उनके धीरे धीरे लुप्त होने का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है.

राष्ट्रीय उद्यान सेवा और राष्ट्रीय वन्यजीवन रिफ्यूज़ जैसी योजनाओं के तहत सार्वजनिक स्थानों पर वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पार्क और उद्यान बनाये गए हैं, जिससे जानवरों और पौधों के भविष्य की पीढ़ियों को सुरक्षित किया जा सके.

 

आवास विनाश के अलावा, वन्यजीवन के लिए अन्य खतरे क्या हैं?

अगर हम जीवों के आवास स्थान को नष्ट कर दें तो यक़ीनन ही वे जीव ख़त्म हो जायेंगे. लेकिन आवास के अलावा भी कुछ ऐसी बातें हैं जिनकी तरफ गौर करना हमें बहुत जरुरी है.

फैक्ट्री और चिमनियों से  धुंआ, नदी-तालाब में फैके गए रसायन और कीट नाशक पदार्थ, तेल का रिसाव इत्यादि ऐसी विपदाएं हैं जो जीवों के लिए जहर का काम करती हैं और साथ ही उनकी प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित करती हैं.

शहरीकरण के लिए जंगलों के जानवरों का शिकार, वन्यजीवों की तस्करी और सैन्य हथियारों के परीक्षण में भी वन्यजीवों का काफी नुकसान होता ही है.

इसलिए ही यहाँ मैंने कुछ ऐसी बातें और बतायीं हैं जो वन्य जीवों के जीवन के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकती हैं, ताकि इन छोटी-छोटी बातों पर भी गौर किया जा सके.

 

वन्यजीवों के संरक्षण को कैसे बढ़ावा दिया जाए

1). शिकार के लिए वन्यजीवों की हत्या ना करें.

2). प्रकृति की सुंदरता को पास से देखने के लिए उनको पकड़ने के बजाय उनके फोटो या वीडियो ले सकते हैं.

3). जंगली जानवरों के आवास की सुरक्षा के लिए बने कानून के दायरे में रहें और साथ ही अपने सुझाव कानून बनाने वाली संस्थाओं तक भी पहुंचायें.

4). अपने घरों के आस-पास सार्वजनिक स्थानों पर जानवरों के रहन-सहन का निरीक्षण करते रहें और अगर कोई दुर्घटना प्रतीत होती है तो तुरंत सुरक्षा विभाग को सूचित करें.

 

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उम्मीद करता हूँ कि ये आर्टिकल “Best Essay on Wildlife Conservation in Hindi/ वन्य जीव संरक्षण आपको पसंद आया होगा.

 

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One Response

  1. Hindi Gayan October 28, 2018

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