Oops! It appears that you have disabled your Javascript. In order for you to see this page as it is meant to appear, we ask that you please re-enable your Javascript!

हडप्पा सभ्यता सिंधु घाटी सभ्यता

हडप्पा सभ्यता सिंधु घाटी सभ्यता

हडप्पा सभ्यता: सिंधु घाटी सभ्यता

हडप्पा सभ्यता या सिंधु घाटी सभ्यता को इस नाम से इसलिए जाना जाता है क्योंकि इसके प्रथम अवशेष हडप्पा नामक स्थल से प्राप्त हुए थे तथा इसके आरंभिक स्थलों में से अधिकांश सिंधु नदी के किनारे अवस्थित थे.

सर्वप्रथम चार्ल्स मैसन ने 1826 में हडप्पा नामक स्थल पर एक प्राचीन सभ्यता के अवशेष मिलने के प्रमाण की पुष्टि की थी.

भारत के पुरातत्व विभाग के जन्मदाता अलेक्जेंडर कनिंघम को माना जाता है. भारतीय पुरातत्व विभाग की स्थापना का श्रेय लार्ड कर्जन को जाता है.

 

संस्कृति/ सभ्यता

पुरातत्वविद संस्कृति शब्द का प्रयोग पुरावस्तुओं के ऐसे समूह के लिए करते हैं जो एक विशिष्ट शैली के होते हैं, जो एक साथ, एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र तथा कालखंड से संबद्ध स्थलों पर पाए जाते हैं.

एक विस्तृत भू-क्षेत्र पर जब संस्कृतियों में समानता पायी जाती है तो उसे सभ्यता कहते हैं.

हडप्पा सभ्यता : इस सभ्यता का सबसे उपयुक्त नाम हडप्पा सभ्यता है क्योंकि सबसे पहले हडप्पा स्थल को ही खोजा गया था.

सिंधु सभ्यता: हडप्पा सभ्यता के प्रारंभिक स्थल सिंधु नदी के आस-पास अधिक केन्द्रित थे, अत इसे सिंधु सभ्यता भी कहा गया परन्तु बाद में अन्य क्षेत्रों से भी स्थलों की खोज होने से अब इसका सर्वाधिक उपयुत नाम यही रह गया है.

सिंधु- सरस्वती सभ्यता: हडप्पा का मुख्य क्षेत्र सिंधु घाटी नही बलिक सरस्वती तथा उसकी सहायक नदियों का क्षेत्र था जो सिंधु व गंगा के बीच स्थित था, इसलिए कुछ विद्वान इसे सिंधु-सरस्वती सभ्यता भी कहते हैं.

कांस्य युगीन सभ्यता: सिंधुवासियों ने प्रथम बार तांबे में टिन मिलाकर कांसातैयार किये थे, इसलिए इसे कांस्य युगीन सभ्यता भी कहा जाता है.

 

सिंधु घाटी सभ्यता कितनी पुरानी….??

 

हडप्पा सभ्यता सिंधु घाटी सभ्यता

 

भारतीय पुरातत्व विभाग के वैज्ञानिकों ने सिंधु घाटी सभ्यता की प्राचीनता को लेकर कई नए तथ्यों की जानकारी दी है.

वैज्ञानिकों के अनुसार सिंधु घाटी सभ्यता 5500 वर्ष नही बल्कि 8000 वर्ष पुरानी है. यह सभ्यता मिश्र और मेसोपोटामिया की सभ्यता से भी पहले अस्तित्व में आ चुकी थी.

मेसोपोटामिया सभ्यता 6500 ईसा पूर्व से 3100 ईसा पूर्व तक मानी जाती है. वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने 3000 वर्ष पूर्व इस सभ्यता के नष्ट होने के कारणों का पता लगा लिया है. उनके अनुसार मौसम में बदलाव के कारण से यह सभ्यता नष्ट हो गयी थी.

 

वैज्ञानिकों की टीम इस बात का अध्ययन करने में जुटी थी कि सिंधु घाटी सभ्यता का विस्तार हरियाणा के भिर्राना और राखिगढ़ी में भी था. अब तक इस सभ्यता के प्रमाण पाकिस्तान के हडप्पा और मोहनजोदड़ो के अलावा भारत के लोथल, धौलावीरा और कालीबंगन में ही मिले थे.

वैज्ञानिकों ने भिर्रना के नए स्थलों का उत्खनन किया और इस दौरान उन्हें जानवरों की हड्डियाँ, गायों के सींग, बकरियों हिरन और चिकारे के अवशेष मिले.

हडप्पा सभ्यता को अपने आखिरी चरण में खराब मानसून का सामना करना पड़ा था, इसी कारण से बड़े पैमाने पर लोगों ने पलायन किया और लोगों की संख्या में गिरावट आई. बस्तियों के खाली हो जाने के बाद हडप्पा की लिपि भी समाप्त हो गयी.

 

सिंधु सभ्यता का काल

सिंधु हडप्पा काल (3500- 2600 ई. पू.)

परिपक्व हडप्पा काल (2600- 1900 ई. पू.)

उत्तर हडप्पा काल (1900- 1300 ई. पू.)

 

हडप्पा के 4 भौगोलिक स्थल

1). मांडा

अखनूर जिले में चिनाव नदी के दक्षिण तट पर स्थित है जो विकसित हडप्पा सभ्यता का सर्वाधिक उत्तरी स्थल है. इसका उल्लघन 1982 ई. में जगपत जोशी व मधुबाला ने करवाया था.

 

2). आलमगीरपुर

यह मेरठ जिले में हिंडन नदी के तट पर स्थित है जिसकी खोज 1958 ई. में भारत सेवक समाज संस्था ने की थी. यह सिंधु सभ्यता का सर्वाधिक पूर्वी स्थल है.

 

3). दैमाबाद

यह महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में प्रवरा नदी के बांये किनारे पर स्थित है. यहाँ सैंधव प्रकार का एक मानव- शावाधन भी मिलता है जहाँ एक गर्त में युवा पुरुष का शव पाया जाता है. दैमाबाद सैंधव सभ्यता का सबसे दक्षिणी स्थल है.

 

4). सुत्कागेनडोर

यह दाशक नदी के किनारे स्थित हडप्पा सभ्यता का सबसे पश्चिमी स्थल है, जिसकी खोज 1927 ई. में सर मार्क औरिल स्टाइन ने की थी. इसका दुर्ग एक प्राकृतिक चट्टान पर स्थित था.

हडप्पा सभ्यता सिंधु घाटी सभ्यता

 

नगर विन्यास की पद्धति

टीला

जब लोग एक ही स्थल पर नियमित रूप से रहते हैं तो इस भूमि- खंड के अनवरत उपयोग तथा पुन उपयोग से आवासीय मलबों का निर्माण हो जाता है जिन्हें टीला कहते हैं. सिंधु घाटी सभ्यता में इंटों का अनुपात 4:2:1 था जिससे वे अपने घरों का निर्माण करते थे.

 

वास्तुकला

भवन निर्माण की कला को वास्तुकला कहा जाता है. भारत में वास्तुकला का आरम्भ सिंधुवासियों ने किया था.

घरों का निर्माण एक सीध में सडकों के किनारे व्यवस्थित रूप में किया जाता था, जिनके दरवाज़े गलियों या सहायक सडकों की ओर खुतले थे. भवन 2 मंजिलें भी थे, घरों में कई कमरे, रसोईघर, स्नानागार तथा बीच में आँगन की व्यवस्था थी.                                                                                                                                              कृषि

वे चावल उत्पादन से परिचित थे, चावल के उत्पादन का साक्ष्य लोथल व रंगपुर से मिले हैं.

लोथल व सौराष्ट्र से बाजरे की खेती व रोजदी से रागी के विषय में साक्ष्य मिले हैं.

विश्व में कपास उगाने वालों में सिन्धुवासी प्रथम थे इसलिए मेसोपोटामिया में कपास के लिए सिंधु शब्द का प्रयोग किया जाने लगा.

 

पशुपालन

सिन्धुवासी हाथी व घोड़े से परिचित थे लेकिन वे उन्हें पालतू बनाने में सफल नही हो सके थे क्योंकि हाथी व घोड़े पालने के साक्ष्य प्रमाणित नही हो सके हैं.

सिन्धुवासियों को गैंडा, बंदर, भालू आदि जंगली जानवरों का भी ज्ञान था.

 

अंतिम संस्कार

सिंधु सभ्यता में मृतकों के अंतिम संस्कार की 3 प्रथा मिलती हैं.

दाह- संस्कार: इसमें शव को पूर्ण रूप से जलाने के बाद भश्मावेश को मिटटी के पात्र में रखकर दफना दिया जाता था (ये प्रथा हिन्दू विधि से मिलती है).

पूर्ण समाधिकरण: इसमें सम्पूर्ण शव को भूमि में दफना दिया जाता था (मुस्लिम विधि से मिलती प्रथा).

आंशिक समाधिकरण: इसमें पशु- पक्षियों के खाने के बाद बचे शेष भाग को भूमि दफना दिया जाता था (पारसी विधि से मिलती प्रथा).

 

लिपि

सिंधु लिपि के बारे में सर्वप्रथम विचार व्यक्त करने वाला प्रथम व्यक्ति अलेक्जेंडर कनिंघम थे. 1873 ई. में कनिंघम ने विचार व्यक्त किया कि इस लिपि का सम्बन्ध ब्राह्मी लिपि से है.

सिंधु लिपि के जो साक्ष्य मिले हैं उनके सार्वधिक साक्ष्य चित्रात्मक है, कुछ साक्ष्य भावचित्रात्मक व अत्यल्प साक्ष्य अक्षरात्मक है.

माना जाता है कि सिंधु लिपि चित्रात्मक थी, इस लिपि में मछली, चिड़िया, मानवाकृति के चिन्ह मिलते हैं.

सिंधु लिपि में जो नमूने मिले हैं उनमें अधिकांस दायें से बाएं लिखे मिले हैं. इस लिपि में अंग्रेजी के U अक्षर व मछली के चित्रों का सर्वाधिक अंकन मिलता है.

 

क्या हडप्पा संस्कृति वैदिक थी….??

हडप्पा संस्कृति को ऋग्वैदिक कहते हैं, लेकिन इसकी प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है. ऋग्वेद में केवल जौं का उल्लेख है, लेकिन हडप्पा संस्कृति के लोगों को गेंहू, तिल और मटर को भी जानकारी थी. हडप्पा संस्कृति के लोग गैंडा से परिचित थे, लेकिन यह वैदिक लोगों को अज्ञात था.

हडप्पा संस्कृति के लोगों को लेखन कला ज्ञात थी, उनकी लिखाई को जिसे सिंधु लिपि कहते हैं. इस प्रकार हडप्पा संस्कृति के लोगों की भाषा के बारे में हमें स्पष्ट अनुमान ही है लेकिन प्रारंभिक वैदिक्जन हिन्दू आर्य भाषा बोलते थे.

हडप्पा समाज और संस्कृति

 

हडप्पा सभ्यता: महत्वपूर्ण तथ्य

1). स्त्री मूर्तियों अधिक मिलने से सिंधु सभ्यता का समाज मात्रसत्तात्मक थी.

2). पासा इस युग का प्रमुख खेल था. ये लोग योगासन भी करते थे.

3). सैंधव सभ्यता कांस्ययुगीन सभ्यता थी तथा यहाँ के लोग लोहे से परिचित नही थे.

4). मोहनजोदड़ो में मिली प्रसिद्ध नर्तकी की कांस्य प्रतिमा से इस युग में कांस्य का प्रयोग किये जाने का पता चलता है.

5). रोपड़ से एक ऐसा कब्रिस्तान मिला है जिसमें मनुष्य के साथ पालतू कुत्ता भी दफनाया गया था.

6). लोथल और देश्पुर से तांबे की मुहरें मिली हैं.

7).लोथल से चावल के अवशेष व रंगपुर से धान की भूसी प्राप्त हुई है.

8).हडप्पा संस्कृति में घोड़े के अस्तित्व को स्वीकार नही किया जाता है परन्तु गुजरात के सुरकोटडा से घोड़े के अस्धिपंजर, मोहनजोदड़ो को एक उपरी सतह से घोड़े के अस्धिपंजर के अस्तित्व का संकेत मिला था.

 

Also Read:

स्वर्णिम भारत का इतिहास History of India in Hindi

वैदिक सभ्यता: संस्कृति साहित्य और इतिहास

मुग़ल काल और साम्राज्य/ Mughal empire Period in Hindi

1857 की क्रांति विद्रोह/ 1857 Kranti Vidroh in Hindi

Renewable Energy Resources in Hindi

 

उम्मीद करता हूँ कि आपको “हडप्पा सभ्यता सिंधु घाटी सभ्यता” आर्टिकल पसंद आया होगा.

Thanks a lot to be BusinessBharat Blog reader….
Hope you Enjoy & Learn !!

Leave a Reply