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राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम Rashtriya Geet in Hindi

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम Rashtriya Geet in Hindi

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम Rashtriya Geet in Hindi

जो भरा नहीं है भावों से ..बहती जिसमें रस धार नहीं……

     वो हृदय नहीं वो पत्थर है… जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं.

 

राष्ट्रीय गीतवंदे मातरम् शब्द भारत के स्वतंत्रता संग्राम की जंग में देशभक्तों के दिलों में जोश भरने वाला नारा था जो देश के लोगों में देशभक्ति की भावना को और प्रबल करता था. जब जब लोग संग्राम के लिए कोई ख़ास तैयारी करते और नेतृत्वकर्ता अपने भाषण को ख़त्म होने पर “वन्दे मातरम का नारा देकर ही अपनी बात को ख़त्म  करते थे.

24 जनवरी 1950 में “बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय” द्वारा रचित उपन्यास “आनंद मठ” के वंदे मातरम् गीत के पहले दो छंद को भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप  सम्मानित किया गया.

राष्ट्र गान “जन गण मन” वैसे तो पहले ही भारत का राष्ट्रीय गान घोषित हो चुका था लेकिन आज़ादी के समय में राष्ट्र गान की अपेक्षा राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम् की ज्यादा लोकप्रियता थी, जिसकी महत्ता के चलते इसे 1950 में आज़ादी के बाद राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया.

वो सभी देशभक्त नर और नारी जो अपने देश के लिए स्वेच्छा से प्राणों की आहुति तक देने के लिए तैयार हो गए, उनके लिए इस गीत ने उनके उत्साह और साहस को दोगुना कर दिया और मातृभूमि पर अपने को बलिदान के योग्य बनाया.

तो चलिए उसी देशभक्ति भरे भाव के साथ हम इस आर्टिकल “राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम Rashtriya Geet in Hindi को शुरू करते हैं और अगर आपको अच्छा लगे तो कमेंट करके जरूर बताइएगा।

 

 

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् और उसका हिंदी अनुवाद

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्ययाय ने अपना उपन्यास आनंद मठ बंगाली भाषा में लिखा था और इसके बावजूद वंदे मातरम् गीत को संस्कृत भाषा में लिखा गया था. आनंद मठ में वंदे मातरम् के मुख्य रूप से 6 छंद हैं जबकि 1950 में वनडे मातरम् के सिर्फ शुरुआत के 2 छंदों को ही राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया.

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के बोल-

वन्दे मातरम सुजलाम सुफलाम् मलयजशीतलाम

शष्यश्यामलाम मातरम् वन्दे मातरम

शुभ्र ज्योत्सानम पुलकित यामिनीम

फुल्ल कुसुमिता

सुमधुर भाषिणीम

सुखदाम वरदाम

मातरम्

वन्दे मातरम

 

वंदे मातरम् के इन छंदों ने समकालीन राष्ट्रवादियों की मनोदशा पर गहरा प्रभाव डाला  देशभक्ति के गुणों को आत्मसात किया. भारत के अरविन्द घोष ने वंदे मातरम् का अनुवाद अंग्रेजी भाषा में किया और इसको अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रसिद्ध किया.

National Song of India

 

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् का हिंदी अनुवाद

हे माँ, मैं आपके सामने नतमस्तक होता हूँ.

जो जल से सीची गयी और फलों से भरी है,

जो दक्षिण की वायु के समान शांत है,

जो फसलों की कटाई से गहरी है,

हे माँ.

 

जिसकी रातें चांदनी से भरी हुई प्रफुल्लित रहती हैं,

जिसका धरातल सुंदर फूलों वाले वृक्षों से ढका हुआ है,

जिसकी हंसी और वाणी में मिठास है,

जो माता वरदान जैसा आनंद देने वाली है,

माता के सामने मैं नतमस्तक होता हूँ.

 

साहित्यिक मूलभूत

 

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम Rashtriya Geet in Hindi

 

वंदे मातरम् को बंकिम चंद्र ने आनंद मठ को लिखने से पहले ही लिख लिया था, जो कि बंगाली भाषा में ही लिखा गया था. इस गीत ने बंगाली भाषा के सम्मान में वृद्धि करने के साथ उसको सुसज्जित भी किया है. इस गीत में सर्वोच्च देवी माँ दुर्गा की वंदना भी की गयी है.

बाद में बंकिम चंद्र ने इस गीत को अपने उपन्यास आनंद मठ में सम्मिलित किया. आनंद मठ में उन्होंने भिक्षुक लोगों के ऐसे समूह का वर्णन किया है जो मौजूदा मुस्लिम शासकों और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अत्याचारों से परेशान थे और उनके खिलाफ हथियार भी उठाये.

इस गीत में सन्यासी समूह के घोषणापत्र को भी चिन्हित करने के साथ साथ समृद्ध और फसलों से लिप्त भूमि, हरे पत्तियों से ढकी फूलों के झुंड और चमकदार नदियों के साथ साथ प्रकृति के हर पहलु की प्रशंसा की है और यहां मूर्तिपूजा के विषय पर भी बल दिया गया है.

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम Rashtriya Geet in Hindi

Vande Mataram in Hindi

 

वंदे मातरम् की भारतीय राष्ट्रीयवादी आंदोलन में भूमिका

1896 में प्रसिद्ध गीतकार रविंद्रनाथ टैगौर ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सत्र में इस गीत को लयबद्ध करके सबसे सामने सुनाया था.

1906 में जब लार्ड कर्जन ने बंगाल विभाजन के लिए भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन एसोसिएशन शुरू किया तो बंगाल के लोगों ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बंगाल प्रांतीय सम्मलेन में लार्ड कर्जन का पुतला फूंका और जोर उन्नाद के साथ विरोध में वनडे मातरम् के नारे लगाये।

जब राष्ट्रवादियों ने देश की आज़ादी के लिए अंग्रेजों विरोध के लिए इस वनडे मातरम् के नारे का बहुत ज्यादा और पूरे देश में इसका प्रयोग होने लगा तब ब्रिटिश हुकूमत ने इसके प्रति भी रोष दिखाते हुए इसको जबरन बंद करने की भी कोशिश की.

 

लेकिन जब अरविन्द घोष ने वंदे मातरम का अंग्रेजी भाषा में अनुवाद किया तो यह ना केवल भारत देश में, बल्कि सम्पूर्ण विश्व में भारत के लोगों तक पहुँच गया और उस राष्ट्रीय आंदोलन में बच्चे बच्चे की जुबान पर वंदे  मातरम् ही था.

वंदे मातरम् के इस रौशनी के सहारे वीर क्रांतिकारियों ने देशभक्ति से ओत-प्रोत होकर  साहसी कार्य किये और यहां तक कि फांसी के फंदे पर भी वंदे मातरम् के साथ ख़ुशी से गले मिल गए.

वंदे मातरम् की इस अनूठी शक्ति से प्रभावित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 1915 के बाद देश के हर सत्र में राष्ट्रीय वंदे मातरम् का गायन अनिवार्य कर दिया।

 

वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत के रूप में गोद लेना

 

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम Rashtriya Geet in Hindi

 

वन्दे मातरम् बहुत जल्दी ही ऐसा गीत बन गया जो भारत देश के हर देशभक्त के होठों तक पहुँच गया, जिसने अनगिनत शहीदों को पवित्र किया जो अपने जीवन को मातृभूमि पर सम्पूर्ण रूप से समर्पित कर चुके थे.

हालांकि मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस गीत के प्रति अपने धार्मिक सिद्धांतों आधार पर रोष व्यक्त किया, क्योंकि यह गीत मातृभूमि को सर्व-शक्तिशाली देवी  में प्रस्तुत किया गया है. जिसके चलते कांग्रेस के कुछ नेताओं ने इसको राष्ट्रीय गीत के रूप में अनुपयुक्त कहा.

 

इसलिए कांग्रेस की बैठक में इस गीत  पहले दो अंतरों को ही राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया गया और इसको भारतीय शास्त्रीय रागों के आधार पर संगीतमय किया गया.

24 जनवरी 1940 को वन्दे मातरम् गीत को आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया गया, जबकि जन गण मन को राष्ट्र गान के तौर पर नामित किया गया.

संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा-

जन गण मन के रूप में लिए जाने वाले शब्दों और संगीत से युक्त रचना भारत का राष्ट्रीय गान है। वंदे मातरम् गीत, जिसने भारतीय स्वतंत्रता के संघर्ष में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है, को जन गण मन के साथ समान रूप से राष्ट्रीय गीत के रूप में सम्मानित किया जाएगा और इसके ही समान स्थिति होगी।”

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम Rashtriya Geet in Hindi

 

राष्ट्रीय गीत पर विवाद

मुस्लिम धर्म मूर्ती पूजा का खंडन करता है, जिसके चलते राजनैतिक दलों के मुस्लिम गुटों ने वन्दे मातरम् का विरोध किया क्योंकि इस गीत में मातृभूमि को देवी के रूप में दर्शाया गया है और पूजा करने का प्रचार किया गया है.

1923 में गीत का पहला सार्वजानिक विरोध मौलाना मोहम्मद अली ने किया था और इन्होने वंदे मातरम् गीत के प्रदर्शन की समाप्ति के लिए प्रयत्न किये.

इस धार्मिक विवाद के चलते कांग्रेस नेतृत्व ने इस गीत को राष्ट्रीय गीत के रूप में समर्थन देने का फैसला किया.

जिसके चलते इस्लामी संगठनों ने इसके खिलाफ फतवा जारी किया, पंजाब में सिख समुदाय के लोगों खालसा स्कूलों में गीत बजाने का विरोध किया और ईसाई लोगों ने भी इसके लिए समर्थन नहीं दिया.

 

राष्ट्रीय गीत का महत्व

वंदे मातरम् गीत के सन्दर्भ में अरविन्द घोष ने कहा कि “राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति है“.

वंदे मातरम् गीत को राष्ट्रीय गीत का दर्जा मिलने के बाद ये गीत भारत के लाखों लोगों के होठों तक तेज़ी से पहुँच गया. केम्ब्रिज विद्वान इस गीत को स्वदेशी आंदोलन का सबसे बड़ा और सबसे स्थायी उपहार मानते हैं.

 

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उम्मीद करता हूँ कि ये आर्टिकल “राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम Rashtriya Geet in Hindi” आपको पसंद आया होगा.

 

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3 Comments

  1. Hindi Vishwa August 12, 2018
  2. Sam August 14, 2018
  3. bajrang Lal August 16, 2018

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